पापा

पापा
अब जब आप चले गए हैं
तो मैं देख रहा हूँ कि
पहले की ही तरह भोर हो रही है
पंछी चहचहा रहे हैं
लोग टहल रहे हैं
पर मेरे लिए ये वक़्त वहीं रुक सा गया है
जहाँ आपकी साँसें रुकी थीं

सुबह के ६ बजे हैं
सामने की छत पर बंदर टहल रहे हैं
मुझे डर है कि कहीं वो
मेरे पुराने घर के बाग़ीचे से पौधे न उखाड़ दें
वो घर जहाँ हम दोनों बैठकर
बीज से पौध और पौध से पौधा
बनने की बातें किया करते थे
अब जब आप चले गए हैं
तो मैंने वो पौधे रोप दिए हैं आपके बाग़ीचे में
आपकी याद में

आपके जाने के बाद
मेरा भी पता बदल गया है
आप भी हैं से थे हो गए हो
आपकी फ़ोटो पर भी लग गई है माला
और मेरे सर पर आपकी पगड़ी
आपकी तस्वीर पर है वही चिर परिचित मुस्कान
और मेरी आँखों में आँसू

एडेनियम में सिंदूरी फूल खिले हैं
हर्षु भी बोलने लगा है दादा
मेरे सर पर भी अब उगने लगे हैं बाल
बंदरों का झुंड भी लौटने लगा है
अब पुराने वाले घर से
उन्होंने पढ़ लिया है
मेरे चेहरे पर चस्पा इस्तिहार

नगर निगम का नोटिस आ गया है
अगले महीने ज़मींदोज होगा पुराना घर
मुक़र्रर हो गई है तारीख़
आपके मृत्यु प्रमाण पत्र की तरह
मेरी तरह शोक में हैं सभी बंदर
कितना दुःखद है ये सब
तारीख़ मुक़र्रर हो जाना
हैं से थे हो जाना
पता बदल जाना

डॉ सुभाष जोनवाल