नवीन रांगियाल

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नवीन रांगियाल की कविताएँ

और उसे खो देता हूँसारी देह को समेट करजब वह उठती है बिस्तर से हेयर बैंड को मुँह में दबाएअपने सारे बालों को बाँधती हैतो...

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