शरतचंद्र चटर्जी

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शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय (१५ सितम्बर, १८७६ - १६ जनवरी, १९३८) बांग्ला के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार एवं लघुकथाकार थे। वे बांग्ला के सबसे लोकप्रिय उपन्यासकार हैं।[1] उनकी अधिकांश कृतियों में गाँव के लोगों की जीवनशैली, उनके संघर्ष एवं उनके द्वारा झेले गए संकटों का वर्णन है। इसके अलावा उनकी रचनाओं में तत्कालीन बंगाल के सामाजिक जीवन की झलक मिलती है। शरतचंद्र भारत के सार्वकालिक सर्वाधिक लोकप्रिय तथा सर्वाधिक अनूदित लेखक हैं।

रचनाएँ

गुरुजी

बहुत दिन पहले की बात है। लालू और मैं छोटे-छोटे थे। हमारी उम्र होगी करीब 10-11 साल। हम अपने गांव की पाठशाला में साथ-साथ...

बाल्य स्मृति

अन्नप्राशन के समय जब मेरा नामकरण हुआ था तब मैं ठीक मैं नहीं बन सका था या फिर बाबा का ज्योतिषशास्त्र में विशेष दख़ल...

देवघर की स्मृतियाँ

डॉक्टरों के आदेशानुसार दवा के बदलाव के लिए देवघर जाना पड़ा। चलते वक्त कवि गुरु की एक कविता बार-बार स्मरण होने लगी - औषुधे डाक्टरेव्याधिर...

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