Facebook
Instagram
Linkedin
Twitter
Youtube
मुख्य पृष्ठ
Shop
आपकी रचना
लेखक
श्रेणियाँ
Search
हिन्दीनामा
साहित्य को समर्पित एक प्रयास
हिन्दीनामा
साहित्य को समर्पित एक प्रयास
मुख्य पृष्ठ
Shop
आपकी रचना
लेखक
श्रेणियाँ
सब्सक्राइब
आपकी रचना
उपन्यास
कविता
कहानी
ग़ज़ल
तरंग कहानी
Search
व्यंग्य
व्यंग्य
दोस्ती निभा पाना बेहद कठिन कार्य है
एकलव्य राय
गाइज़ एक बहुत पुरानी बात बता रहा हूँ.. यूँ समझिए कि जब धरती पर जीवन पनप रहा था उससे साल दो साल बाद की...
और पढ़ें
व्यंग्य
तीसरे दर्जे के श्रद्धेय
हरिशंकर परसाई
बुद्धिजीवी बहुत थोड़े में संतुष्ट हो जाता है। उसे पहले दर्जे का किराया दे दो ताकि वह तीसरे में सफर करके पैसा बचा ले।...
और पढ़ें
व्यंग्य
पिटने-पिटने में फ़र्क़
हरिशंकर परसाई
(यह आत्म प्रचार नहीं है। प्रचार का भार मेरे विरोधियों ने ले लिया है। मैं बरी हो गया। यह ललित निबंध है।) बहुत लोग कहते...
और पढ़ें
प्रचलित
तीसरे दर्जे के श्रद्धेय
हरिशंकर परसाई
पिटने-पिटने में फ़र्क़
हरिशंकर परसाई
दोस्ती निभा पाना बेहद कठिन कार्य है
एकलव्य राय