1.
हो सकता है―
प्यार का यह खयाल मुझे घायल कर दे
फिर भी
तुम हो सकती थी मेरे साथ
घास और मिट्टी के मेरे घर को अपने स्वप्न से सँवारती
मेरी गाय बकरियों को हाँकती और दुलार में
मेमने को अपना ही दूध पिला देती तुम
हो सकती थी वहाँ
जहाँ मेरे बच्चे खेला करते कुत्तों के साथ
और थक कर तुम्हारी गोद में सुस्ताते।
2.
मत करो प्रतीक्षा अब उस लड़की की
जो नहीं लौटेगी तुम्हारे पास
इससे बेहतर है―
कविता की पंक्तियों के बीच
खुद को खो देना
मगर इसके लिए भी तुम्हें सीखना होगा सब्र
जैसे कभी तुम इंतज़ार करते थे
उस सांवली लड़की का
जैसे बारिश का और साल में एक मर्तबा फरवरी का।
3.
उसे आख़िरी बार पुकारने से पहले
साँसे उखड़ने लगीं
तभी यह जाना―
विदा लेना प्राण भी लेता है।
4.
दुःख भी अज़ीब होते हैं
तुम सुंदर हो―
यह लिखते ही
तुम्हारा चेहरा भूल जाता हूँ।
5.
आऊँगा कभी
पछुआ हवा के संग
उतरूँगा
तुम्हारे आँगन के
नीम पर
किसी पतंग की तरह।
6.
बारह बरस के प्रेम को
दो बरस में ही भूल जाना कोई छोटी बात नहीं
बड़ी बात होती―
तुम्हें भूलने में जब बारह सदियाँ लगतीं।
7.
तुमने कहा―
देह दर्द है और आत्मा घाव
फ़िर
मैं पहाड़ बन गया!
8.
धरी रह जाएगी
प्रतीक्षा
पिघलेगा मन
टूटेगा मौन
तुम मेरा नाम पुकारोगी!
9.
मेरे सपने
तुम्हारे नाम जितने ही सुंदर हैं
तुम
मेरी नींद में
करवट बदलती हो!
10.
मैंने मांगा था तुमसे
केवल प्रेम
तुमने अपनी नरम हथेलियों से मेरा माथा सहलाया
और कहा
तुम प्यासे मरोगे!
दीपक सिंह
