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कहानी
मलबे का मालिक
मोहन राकेश
पूरे साढ़े सात साल के बाद लाहौर से अमृतसर आए थे। हॉकी का मैच देखने का तो बहाना ही था, उन्हें ज़्यादा चाव उन...
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कहानी
लालपान की बेगम
फणीश्वर नाथ रेणु
'क्यों बिरजू की माँ, नाच देखने नहीं जाएगी क्या?'बिरजू की माँ शकरकंद उबाल कर बैठी मन-ही-मन कुढ़ रही थी अपने आँगन में। सात साल...
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कहानी
नारंगियाँ
अज्ञेय
उस दिन जब मोहल्लेवालों ने देखा कि हरसू ने मोहल्ले के बाहर की नाम को पक्की, पर वास्तव में धूल-भरी सड़क पर पुआल और...
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कहानी
दूध का दाम
प्रेमचंद
अब बड़े-बड़े शहरों में दाइयाँ, नर्सें और लेडी डाक्टर, सभी पैदा हो गयी हैं; लेकिन देहातों में जच्चेखानों पर अभी तक भंगिनों का ही...
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कहानी
दो बैलों की कथा
प्रेमचंद
जानवरों में गधा सबसे ज्यादा बुद्धिमान समझा जाता है। हम जब किसी आदमी को पहले दर्जे का बेवकूफ कहना चाहते हैं, तो उसे गधा...
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कहानी
नया विवाह
प्रेमचंद
हमारी देह पुरानी है, लेकिन इसमें सदैव नया रक्त दौड़ता रहता है। नये रक्त के प्रवाह पर ही हमारे जीवन का आधार है। पृथ्वी...
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प्रचलित
खोई हुई दिशाएं
कमलेश्वर
डिप्टी कलक्टरी
अमरकांत
अमृतसर आ गया है
भीष्म साहनी
कोसी का घटवार
शेखर जोशी