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खोई हुई दिशाएं
कमलेश्वर
सड़क के मोड़ पर लगी रेलिंग के सहारे चंदर खड़ा था। सामने, दाएँ-बाएँ आदमियों का सैलाब था। शाम हो रही थी और कनॉट प्लेस...
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कहानी
दोपहर का भोजन
अमरकांत
सिद्धेश्वरी ने खाना बनाने के बाद चूल्हे को बुझा दिया और दोनों घुटनों के बीच सिर रखकर शायद पैर की उँगलियाँ या ज़मीन पर...
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कहानी
वाङ्चू
भीष्म साहनी
तभी दूर से वाङ्चू आता दिखाई दिया।नदी के किनारे, लालमंडी की सड़क पर धीरे-धीरे डोलता-सा चला आ रहा था। धूसर रंग का चोगा पहने...
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कहानी
भोर से पहले
अमृतराय
सबेरे का वक़्त है। गंगा-स्नान के प्रेमी अकेले और दुकेले चार-चार छः-छः के गुच्छों में गंगा-तट से लौटकर दशाश्वमेध के तरकारीवालों और मेवाफ़रोशों से...
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कहानी
भोलाराम का जीव
हरिशंकर परसाई
ऐसा कभी नहीं हुआ था…। धर्मराज लाखों वर्षों से असंख्य आदमियों को कर्म और सिफारिश के आधार पर स्वर्ग या नर्क में निवास-स्थान ‘अलाट’...
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कहानी
दो आस्थाएं
अमृतलाल नागर
एक “अरी कहाँ हो? इंदर की बहुरिया”, कहते हुए आँगन पार कर पंडित देवधर की घरवाली सँकरे, अँधेरे, टूटे हुए जीने की ओर बढ़ीं। इंदर की बहू ऊपर कमरे...
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प्रचलित
खोई हुई दिशाएं
कमलेश्वर
डिप्टी कलक्टरी
अमरकांत
अमृतसर आ गया है
भीष्म साहनी
कोसी का घटवार
शेखर जोशी