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कहानी
पिता-ज्ञानरंजन
ज्ञानरंजन
उसने अपने बिस्तरे का अंदाज़ लेने के लिए मात्र आध पल को बिजली जलाई। बिस्तरे फ़र्श पर बिछे हुए थे। उसकी स्त्री ने सोते-सोते...
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कहानी
इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर – हरिशंकर परसाई
हरिशंकर परसाई
वैज्ञानिक कहते हैं, चाँद पर जीवन नहीं है। सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर मातादीन (डिपार्टमेंट में एम. डी. साब) कहते हैं—वैज्ञानिक झूठ बोलते हैं, वहाँ हमारे जैसे...
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कहानी
सिक्का बदल गया- कृष्णा सोबती
कृष्णा सोबती
खद्दर की चादर ओढ़े, हाथ में माला लिए शाहनी जब दरिया के किनारे पहुँची तो पौ फट रही थी। दूर-दूर आसमान के पर्दे पर...
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कहानी
चीफ़ की दावत-भीष्म साहनी
भीष्म साहनी
आज मिस्टर शामनाथ के घर चीफ़ की दावत थी। शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी को पसीना पोंछने की फ़ुर्सत न थी। पत्नी ड्रेसिंग गाउन पहने, उलझे...
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कहानी
गैंग्रीन-अज्ञेय
अज्ञेय
दुपहर में उस सूने आँगन में पैर रखते हुए मुझे ऐसा जान पड़ा, मानो उस पर किसी शाप की छाया मँडरा रही हो, उसके...
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कहानी
तीसरी कसम-फणीश्वरनाथ रेणु
फणीश्वर नाथ रेणु
हिरामन गाड़ीवान की पीठ में गुदगुदी लगती है... पिछले बीस साल से गाड़ी हाँकता है हिरामन। बैलगाड़ी। सीमा के उस पार मोरंगराज नेपाल से धान...
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खोई हुई दिशाएं
कमलेश्वर
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