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अपना अपना भाग्य
जैनेन्द्र कुमार
बहुत कुछ निरुद्देश्य घूम चुकने पर हम सड़क के किनारे की एक बेंच पर बैठ गए। नैनीताल की संध्या धीरे-धीरे उतर रही थी। रूई के...
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कहानी
आकाशदीप
जयशंकर प्रसाद
(एक) बंदी! क्या है? सोने दो। मुक्त होना चाहते हो? अभी नहीं, निद्रा खुलने पर, चुप रहो। फिर अवसर न मिलेगा। बड़ा शीत है, कहीं से एक कंबल डालकर कोई...
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कहानी
उसने कहा था
चन्द्रधर शर्मा गुलेरी
बड़े-बड़े शहरों के इक्के-गाड़ीवालों की ज़बान के कोड़ों से जिनकी पीठ छिल गई है, और कान पक गए हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि...
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कहानी
कानों में कँगना
राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह
1 किरन! तुम्हारे कानों में क्या है?उसके कानों से चंचल लट को हटाकर कहा—कँगना।अरे! कानों में कँगना? सचमुच दो कंगन कानों को घेरकर बैठे थे।हाँ,...
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कहानी
दुनिया का सबसे अनमोल रत्न
प्रेमचंद
दिलफ़िगार एक कँटीले पेड़ के नीचे दामन चाक किए बैठा हुआ ख़ून के आँसू बहा रहा था। वह सौंदर्य की देवी यानी मलका दिलफ़रेब...
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कहानी
ईदगाह
प्रेमचंद
रमज़ान के पूरे तीस रोज़ों के बाद ईद आई है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभात है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ...
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खोई हुई दिशाएं
कमलेश्वर
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