मेरी ज़िंदगी में प्रेम आता है,
किसी आठ साल के शरारती बच्चे की तरह
दरवाज़े की घन्टी बजा कर झट से भाग जाता है
प्रेम मेरी हथेलियों पर पड़ता है,
धूप की तरह
पकड़ने की कोशिश मात्र भी अकल्पनीय है
बरामदे की मुंडेर पर अचानक ही आ बैठता है
किसी कबूतर की भांति
जरा सा शोर करती हूँ,
तो फुर्र से उड़ जाता है
दूसरे किसी मकान की तरफ
सच तो ये है,
कि मेरी ज़िंदगी मे प्रेम का आगमन होता है
संसार के सबसे धीरे कछुए की भांति
और बिल्कुल तेजी से
चला भी जाता है
जैसे रसोई में गिरता है
पतीले पर रखा हुआ दूध
मैंने तुम्हें जब-जब देखा
उपमाओं में बाँधना चाहा
जैसे कि तुम्हारा अस्तित्व
उपमाओं में ही कहीं छिपा है
मैंने तुम्हें फूल कहना चाहा
मगर फिर ख़्याल आया
कि कुछ समय के बाद वे झड़ जाएँगे
खो देंगे अपना अस्तित्व
ज़मीन पर गिर जाएँगे
और उनको रौंदते चले जाएँगे दुनिया के तमाम जूते
मैंने चाहा कि मैं तुम्हें कहूँ
तुम समस्त आकाश हो
तुम्हारे देह पर ही उड़ते हैं रंग-बिरंगे पक्षी
तुम से आबाद है नीला रंग
मगर फिर ज़हन में आया कि
आकाश में उमड़ आते हैं काले बादल
चमकने लगती है बिजली
मैंने चाहा कि मैं तुम्हें कह दूँ
तुम बिल्कुल मेरी प्रिय भाषा की तरह हो
मेरी भाषा में सुंदर बिंब हैं
हैं सुंदर शब्द
मगर अचानक ही याद आया
कि लोगों के द्वारा तहस-नहस
कर दी जाती है भाषा
बिगाड़ दी जाती हैं उसकी उपमाएँ
कहे जाते हैं उसमें दूसरों को कटु शब्द
मैं यूँ ही सोचती रही
तुमको देखती रही
तभी अचानक तुमने एक
रंग-बिरंगी तितली को
अपनी क़ैद से रिहा कर दिया
जैसे उसका घर ये पूरी दुनिया है
जहाँ वो घूम सकती है
नाप सकती है पूरा शहर
मैंने तुमको भी तितली की भाँति
आज़ाद देखा है
इसलिए आख़िरकार मैंने
तुम्हें सभी उपमाओं से रिहा किया
और लिखा
कि तुम बिल्कुल ख़ुद के जैसी हो
सबसे ज़्यादा ख़ूबसूरत
दुनिया की सबसे ज़्यादा ख़ूबसूरत औरत कौन होगी
जो अंगों को स्पर्श करती होगी ख़ुद के
और निहारती रहती होती भीगे हुए केश शीशे के सामने
करते हुए इंतज़ार अपने प्रियतम का,
या फिर जब कोई बिस्तर पर औंधे मुँह पड़ी रहती होगी
और करती होगी याद मरे हुए कवियों को,
मुझे लगता है सबसे ख़ूबसूरत वो औरत रही होगी
जिसने दुनिया में की होगी सबसे पहले क्रांति,
या फिर सबसे ख़ूबसूरत होगी वो औरत
जो दिन रात करती है पूजा और माँगती है भगवान से भीख परिवार की शाँति के लिए,
होती होगी ख़ूबसूरत जायसी के लिए पद्मावती
पर इस दुनिया मे सबसे ख़ूबसूरत है
बेचैनी से भरी एक अल्हड़ लड़की की आँखों में झाँकना ,
और यह जानना की वो ता उम्र एक ऐसे शख़्स के इंतज़ार में मायूस होने वाली है
जो शायद अब कभी नहीं आएगा

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