12 जनवरी 1931 को पाकिस्तान के नौशेरा जिले जन्मे अहमद फराज़ का असली नाम सैयद अहमद शाह था। अहमद फराज़ को जितनी मोहब्बत पाकिस्तान में मिली उतनी ही भारत में भी। आज भी लोग उनकी ग़ज़लों को मुँहजबानी याद करके सुनाते हैं। उन्होंने पाकिस्तान का सबसे बड़ा पुरस्कार ‘हिलाल-ऐ-इम्तियाज़’ इसलिए लौट दिया क्योंकि वह सरकार की नीतियों से सहमत नहीं थे। वह भारतीय उपमहाद्वीप के अलावा भी जहाँ भी उर्दू या हिन्दी बोली जाती थी वहाँ पढ़े गए और मुशायरों में बुलाए गए। उनके प्रमुख ग़ज़ल संग्रह हैं- खानाबदोश, दर्द आशोब, ये मेरी ग़ज़लें वे मेरी नज़्में, ज़िंदगी ! ऐ ज़िंदगी !
उन्हें अपने देश से भी बाहर अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए थे। 25 अगस्त 2008 को उनका निधन हो गया।