बालकृष्ण शर्मा नवीन

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पंडित बालकृष्ण शर्मा "नवीन" का जन्म 8 दिसम्बर, 1897 को मध्य प्रदेश के शुजालपुर जिला शाजापुर के समीप के ग्राम भयाना में हुआ। शर्माजी के साहित्यिक जीवन की पहली रचना 'सन्तू' नामक एक कहानी थी। इसे उन्होंने छपने के लिए सरस्वती में भेजा था। इसके बाद वे कविता की तरफ मुड़े। 'जीव ईश्वर वार्तालाप' शीर्षक की कविता से हिन्दी जगत इन्हें पहचानने लगा। इन सबसे अलग वे स्वतंत्रता आंदोलन में भी भाग लेने लगे। महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में भाग लेने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़कर राजनीति के क्षेत्र में आ गए। यहीं से नवीनजी की जेल यात्राओं का अनवरत सिलसिला शुरू हुआ, जो देश की आजादी तक निरंतर चलता रहा। असहयोग आंदोलन के बाद नमक सत्याग्रह, फिर व्यक्तिगत सत्याग्रह और अन्त में 1942 का ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन। इस प्रकार कुल छः जेल यात्राओं में जिन्दगी के नौ साल नवीनजी ने जेल में बिताये। शर्माजी की सर्वश्रेष्ठ रचनाएं इन्हीं जेल यात्राओं के दौरान रची गईं। उनकी प्रमुख रचनाएं हैं- कुमकुम, रश्मिरेखा, अपलक, क्वासि, उर्मिला, विनोबा स्तवन, प्राणार्पण तथा हम विषपायी जन्म के। उन्हेँ सन 1960 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।

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