हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार भगवतीचरण वर्मा का जन्म 30 अगस्त 1903 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के शफीपुर गाँव में हुआ था । हिंदी साहित्य का आधुनिक काल भारत के इतिहास के बदलते हुए स्वरूप से प्रभावित था। स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीयता की भावना का प्रभाव साहित्य में भी आया। भारत में औद्योगीकरण का प्रारंभ होने लगा था। आवागमन के साधनों का विकास हुआ। अंग्रेजी और पाश्चात्य शिक्षा का प्रभाव बढा और जीवन में बदलाव आने लगा। ईश्वर के साथ साथ मानव को समान महत्त्व दिया गया। भावना के साथ-साथ विचारों को पर्याप्त प्रधानता मिली। पद्य के साथ-साथ गद्य का भी विकास हुआ और छापेखाने के आते ही साहित्य के संसार में एक नई क्रांति हुई। आधुनिक हिन्दी गद्य का विकास केवल हिन्दी भाषी क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहा। पूरे देश में और हर प्रदेश में हिन्दी की लोकप्रियता फैली और अनेक अन्य भाषी लेखकों ने हिन्दी में साहित्य रचना करके इसके विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान किया।
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं-
उपन्यास-
पतन, चित्रलेखा, तीन वर्ष, टेढ़े-मेढ़े रास्ते, अपने खिलौने, भूले-बिसरे चित्र, वह फिर नहीं आई, सामर्थ्य और सीमा, थके पाँव, रेखा, सीधी सच्ची बातें, युवराज चूण्डा, सबहिं नचावत राम गोसाईं, प्रश्न और मरीचिका, धुप्पल, चाणक्य, क्या निराश हुआ जाए।
कहानी-संग्रह-
दो बांके, मोर्चाबंदी, इंस्टालमेंट, मुगलों ने सल्तल्त बख्श दी।
कविता-संग्रह-
मधुकण, 'प्रेम-संगीत' और 'मानव' निकले।
नाटक-
वसीहत, रुपया तुम्हें खा गया, सबसे बड़ा आदमी।
संस्मरण-
अतीत के गर्भ से।
साहित्यालोचन-
साहित्य के सिद्घान्त, रुप।
उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कारऔर पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया, तथा राज्यसभा की मानद सदस्यता प्राप्त हुई थी।