चित्रा मुद्गल

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चित्रा मुद्गल का जन्म 10 सितंबर 1944 को चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ था स्नातकोत्तर पढ़ाई पत्राचार पाठ्यक्रम के माध्यम से एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय मुंबई से की। चित्रकला में गहरी अभिरुचि रखने वाली चित्रा ने जे.जे.स्कूल ऑफ आर्टस से फाइन आर्टस का अध्ययन भी किया है। सोमैया कॉलेज में पढ़ाई के दौरान श्रमिक नेता दत्ता सामन्त के संपर्क में आकर श्रमिक आंदोलन से जुड़ीं। उन्हीं दिनों घरों में झाडू-पोंछा कर, उत्पीड़न और बदहाली में जीवन-यापन करने वाली बाइयों के उत्थान और बुनियादी अधिकारों की बहाली के लिए संघर्षरत संस्था 'जागरण' की बीस वर्ष की वय में सचिव बनीं। प्रखर चेतना की संवाहिका चित्रा जी के पास अनुभवों का विपुल भंडार है। उन्होंने समाज के विभिन्न समुदायों, विशेषकर दलित-शोषितों के बीच पैठ कर काम किया है। आंदोलनमुखी संगठनों से इनका गहरा नाता है। इनकी मान्यता है कि सामाजिक परिवर्तनों की दिशा में आंदोलनों की निर्णायक भूमिका है। उपन्यास :- आवां, गिलिगडु, एक जमीन अपनी,पोस्ट बॉक्स नंबर 203- नाला सोपारा । कहानी-संग्रह : लपटें, बयान - ( (गरीब की माँ, बयान, डोमिन काकी, आतंकवाद, पहचान, ऐब, राक्षस, गणित, मिट्टी, नाम, गली, रिश्ता, शहर, सेवा, सेवक, रक्षक-भक्षक, बोहनी, व्यावहारिकता, पत्नी, पाठ, मानदण्ड, बाज़ार प्राथमिकता, नसीहत, मर्द, भूखे-नंगे, दूध, धर्म, घर।), भूख : (भूख, लेन, चेहरे, फातिमाबाई कोठे पर ही नहीं रहती, इस हमाम में, ब्लेड, जरिया, वाइफ स्वैपी, होना संपादक की पत्नी—एक लेखिका का, बंद।), मामला आगे बढ़ेगा अभी : (मामला आगे बढ़ेगा अभी, अग्निरेखा, शिनाख्त हो गई है, पाली का आदमी, त्रिशंकु, लाक्षागृह, अपी वापसी, लिफाफा, गर्दी, शून्य, दरमियान, मोरचे पर।), दस प्रतिनिधि कहानियाँ : (गेंद, लेन, जिनावर, जगदंबा बाबू आ रहे हैं, भूख, प्रेतयोनि, बलि, दशरथ का वनवास, केंचुल, बाघ।), लकड़बग्घा : (प्रमोशन, सौदा, अभी भी, जगदंबा बाबू आ रहे हैं, लकड़बग्घा, मुआवज़ा, बेईमान, ट्रेन छूटने तक, ताशमहल, सफेद सेनारा।), इस हमाम में, ग्यारह लंबी कहानियाँ, जहर ठहरा हुआ, लाक्षागृह, अपनी वापसी, मेरी रचना यात्रा, जगदंबा बाबू गाँव आ रहे हैं, जानवर। बाल-साहित्य : देश-देश की लोक कथाएँ, माधवी-कन्नगी (उपन्यास), सबक, जंगल का राज, नीति कथाएँ (कहानी-संग्रह) नाट्य रूपांतरण : बूढ़ी काकी तथा अन्य नाटक, पंच परमेश्वर तथा अन्य नाटक, सद्गति तथा अन्य नाटक। संपादन : दूसरी औरत की कहानियाँ, असफल दांपत्य की कहानियाँ, टूटते परिवारों की कहानियाँ। पुरस्कार : इन्हें बहुचर्चित उपन्यास ‘आवां’ पर सहस्राब्दि का पहला अंतर्राष्ट्रीय ‘इन्दु शर्मा कथा सम्मान’ लंदन (इंग्लैंड) में पाने का गौरव प्राप्त हुआ। चित्रा जी को बिड़ला फाउंडेशन का ‘व्यास सम्मान’, ‘हिंदी अकादमी, दिल्ली का ‘साहित्यकार सम्मान’, ‘विकास’ काया फाउंडेशन द्वारा सामाजिक कार्यों के लिए ‘विदुला सम्मान’ और उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा ‘साहित्य भूषण सम्मान’ से समलंकृत किया गया है। कृति ‘पोस्ट बॉक्स नंबर 203- नाला सोपारा’ पर साहित्य अकादमी सम्मान से सम्मानित किया गया।

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