गजानन माधव 'मुक्तिबोध' (Gajanan Madhav Muktibodh) का जन्म 13 नवंबर 1917 को श्योपुर (शिवपुरी) में हुआ था। वह हिन्दी साहित्य के प्रमुख कवि, आलोचक, निबंधकार, कहानीकार तथा उपन्यासकार थे। उन्हें प्रगतिशील कविता और नयी कविता के बीच का एक सेतु भी माना जाता है। मुक्तिबोध तारसप्तक के पहले कवि थे। मनुष्य की अस्मिता, आत्मसंघर्ष और प्रखर राजनैतिक चेतना से समृद्ध उनकी कविता पहली बार 'तार सप्तक' के माध्यम से सामने आई, लेकिन उनका कोई स्वतंत्र काव्य-संग्रह उनके जीवनकाल में प्रकाशित नहीं हो पाया। मृत्यु के पहले श्रीकांत वर्मा ने उनकी केवल 'एक साहित्यिक की डायरी' प्रकाशित की थी, जिसका दूसरा संस्करण भारतीय ज्ञानपीठ से उनकी मृत्यु के दो महीने बाद प्रकाशित हुआ। ज्ञानपीठ ने ही 'चाँद का मुँह टेढ़ा है' प्रकाशित किया था।कविता के साथ-साथ, कविता विषयक चिंतन और आलोचना पद्धति को विकसित और समृद्ध करने में भी मुक्तिबोध का योगदान अन्यतम है।
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं-
चाँद का मुँह टेढ़ा है – (कविता संग्रह), नई कविता का आत्मसंघर्ष तथा अन्य निबंध (निबंध संग्रह), एक साहित्यिक की डायरी (निबंध संग्रह), काठ का सपना (कहानी संग्रह), विपात्र (उपन्यास), नये साहित्य का सौंदर्यशास्त्र, सतह से उठता आदमी (कहानी संग्रह), कामायनी: एक पुनर्विचार, भूरी-भूरी खाक धूल, मुक्तिबोध रचनावली, नेमिचंद्र जैन द्वारा संपादित, समीक्षा की समस्याएं।