गिरिजा कुमार माथुर

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गिरिजाकुमार माथुर एक कवि, नाटककार और समालोचक के रूप में जाने जाते हैं।उनका जन्म 22 अगस्त 1919 को म.प्र. के गुना जिले में हुआ। गिरिजाकुमार माथुर ने साहित्य में अपना करियर 1934 में ब्रज भाषा में शुरू किया। वे माखनलाल चतुर्वेदी और बालकृष्ण शर्मा जैसे लेखकों से काफी प्रभावित हुए, उन्होंने 1941 में अपना पहला संकलन, 'मंजीर' प्रकाशित किया। हिंदी साहित्य में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने समाज को नैतिक संदेश देने का कार्य अपनी कलम से कविताओं के माध्यम से किया। गिरिजाकुमार माथुर तार सप्तक में शामिल सात प्रख्यात हिंदी कवियों में से एक थे। कविताओं के अलावा, उन्होंने कई नाटक, गीत और निबंध भी लिखे। उनकी प्रमुख रचनाएं है- मंजीर, 'तार सप्तक' में संगृहीत कविताएँ, नाश और निर्माण, धूप के धान, शिलापंख चमकीले, जो बँध नहीं सका, भीतरी नदी की यात्रा, छाया मत छूना मन, साक्षी रहे वर्तमान, पृथ्वीकल्प, मैं वक्त के हूँ सामने, मुझे और अभी कहना है। उन्हें शलाका सम्मान, साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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