गिरीश कर्नाड भारत के जाने माने समकालीन लेखक, अभिनेता, फ़िल्म निर्देशक और नाटककार थे। इन्होंने अंग्रेजी और कन्नड़ दोनों भाषाओं में समान रूप से लिखते थे। उनका जन्म 19 मई 1938 को हुआ था। उन्होंने ऑक्सफोर्ड के लिंकॉन तथा मॅगडेलन महाविद्यालयों से दर्शनशास्त्र, राजनीतिशास्त्र तथा अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। वे शिकागो विश्वविद्यालय के फुलब्राइट महाविद्यालय में विज़िटिंग प्रोफ़ेसर भी रहे। कर्नाड की प्रसिद्धि एक नाटककार के रूप में ज्यादा है। कन्नड़ भाषा में लिखे उनके नाटकों का अंग्रेजी समेत कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। जिस समय उन्होंने कन्नड़ में लिखना शुरू किया उस समय कन्नड़ लेखकों पर पश्चिमी साहित्यिक पुनर्जागरण का गहरा प्रभाव था। लेखकों के बीच किसी ऐसी चीज के बारे में लिखने की होड़ थी जो स्थानीय लोगों के लिए बिल्कुल नई थी। इसी समय कार्नाड ने ऐतिहासिक तथा पौराणिक पात्रों से तत्कालीन व्यवस्था को दर्शाने का तरीका अपनाया तथा काफी लोकप्रिय हुए।
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं- ययाति, तुगलक, हयवदन, अंजुमल्लिगे, बलि, नागमंडल, रक्त कल्याण, अग्नि और बरखा, टीपू सुल्तान के ख़्वाब, शादी का एल्बम, बिखरे बिम्ब,पुष्प।
उन्हें 1972 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार ('तुग़लक' के लिए), 1974 में पद्मश्री, कमलादेवी चट्टोपाध्याय पुरस्कार 'हयवदन' के लिए, 1992में पद्मभूषण तथा कन्नड़ साहित्य परिषद् पुरस्कार, 1994में साहित्य अकादमी पुरस्कार ('रक्त कल्याण' के लिए) तथा 1998 में ज्ञानपीठ पुरस्कार (साहित्य में समग्र योगदान के लिए) से सम्मानित किया गया।