गोपालदास नीरज

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4 जनवरी 1925 को जन्मे गोपालदास नीरज हिन्दी साहित्य के गीतकार के रूप में प्रसिद्ध रहे। कवि सम्मेलनों में तो नीरज जीवनपर्यंत छाए ही रहे साथ-ही-साथ हिन्दी फिल्मों में भी उन्होंने गीत लिखे। पहली ही फ़िल्म में उनके लिखे कुछ गीत जैसे कारवाँ गुजर गया गुबार देखते रहे और देखती ही रहो आज दर्पण न तुम, प्यार का यह मुहूरत निकल जायेगा बेहद लोकप्रिय हुए जिसका परिणाम यह हुआ कि वे बम्बई में रहकर फ़िल्मों के लिये गीत लिखने लगे। फिल्मों में गीत लेखन का सिलसिला मेरा नाम जोकर, शर्मीली और प्रेम पुजारी जैसी अनेक चर्चित फिल्मों में कई वर्षों तक जारी रहा। इनके प्रमुख कविता संग्रह हैं - संघर्ष (1944), अन्तर्ध्वनि (1946), विभावरी (1948), प्राणगीत (1951), दर्द दिया है (1956), बादर बरस गयो (1957), मुक्तकी (1958), दो गीत (1958), नीरज की पाती (1958), गीत भी अगीत भी (1959), आसावरी (1963), नदी किनारे (1963), लहर पुकारे (1963), कारवाँ गुजर गया (1964), फिर दीप जलेगा (1970), तुम्हारे लिये (1972),नीरज की गीतिकाएँ (1987) आदि। नीरज जी को 1991 में पद्मश्री और 2007 में पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 19 जुलाई 2018 को नीरज जी का देहांत हो गया।

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