गोविंद मिश्र
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गोविंद मिश्र का जन्म 1 अगस्त 1939 को हुआ था। समकालीन कथा-साहित्य में उनकी अपनी अलग पहचान है - एक ऐसी उपस्थिति जो एक सम्पूर्ण साहित्यकार का बोध कराती है, जिसकी वरीयताओं में लेखन सर्वोपरि है, जिसकी चिन्ताएँ समकालीन समाज से उठकर ‘पृथ्वी पर मनुष्य’ के रहने के सन्दर्भ तक जाती हैं और जिसका लेखन-फलक ‘लाल पीली ज़मीन’ के खुरदरे यथार्थ, ‘तुम्हारी रोशनी में’ की कोमलता और काव्यात्मकता, ‘धीरसमीरे’ की भारतीय परम्परा की खोज, ‘हुजूर दरबार’ और ‘पाँच आँगनोंवाला घर’ की इतिहास और अतीत के सन्दर्भ में आज के प्रश्नों की पड़ताल - इन्हें एक साथ समेटे हुए है। कम साहित्यकार होंगे जिनका इतना बड़ा ‘रेंज’ होगा और जिनके सृजित पात्रों की संख्या की हज़ार से ऊपर पहुंच रही होगी, जिनकी कहानियों में एक तरफ़ ‘कचकौंध’ के गँवई गाँव के मास्टर साहब हैं तो ‘मायकल लोबो’ जैसा आधुनिक पात्र या ‘ख़ाक इतिहास’ की विदेशी मारिया भी।
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं-
उपन्यास - वह अपना चेहरा, उतरती हुई धूप, लाल पीली जमीन, हुजूर दरबार, तुम्हारी रोशनी में, धीर समीरे, पाँच आंगनों वाला घर, फूल... इमारतें और बन्दर, कोहरे में कैद रंग, धूल पौधों पर।
कहानी संग्रह - नये पुराने माँ-बाप, अंत:पुर, धांसू, रगड़ खाती आत्महत्यायें, मेरी प्रिय कहानियाँ, अपाहिज, खुद के खिलाफ, खाक इतिहास, पगला बाबा, आसमान कितना नीला, स्थितियाँ रेखांकित, (साठ के बाद की हिन्दी कहानी का संकलन सम्पादित) हवाबाज, मुझे बाहर निकालो।
यात्रा-वृत्तान्त - धुंध भरी सुर्खी, दरख्तों के पार... शाम, झूलती जड़ें, परतों के बीच और यात्राएं ...।
साहित्यिक निबंध - साहित्य का संदर्भ, कथा भूमि, संवाद अनायास, समय और सर्जना।
बाल साहित्य - कवि के घर में चोर-राधाकृष्ण प्रकाशन, मास्टर मन्सुखराम, आदमी का जानवर।
कविता - ओ प्रकृति माँ।
विविध - मुझे घर ले चलो (सभी विधाओं का प्रतिनिधि संकलन, लेखक की जमीन-अलग-अलग समय पर दिये गये साक्षात्कारों का संकलन, अर्थ ओझल (भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित प्रमुख बीस कहानियों का संग्रह), दस प्रतिनिधि कहानियाँ, चर्चित कहानियाँ, निर्झरिणी (दो खण्डों में सम्पूर्ण कहानियों का संकलन, प्रतिनिधि कहानियाँ, मेरे साक्षात्कार, चुनी हुई रचनाएँ-तीन खंडों में।
उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, भारतीय भाषा परिषद कलकत्ता, साहित्य अकादमी दिल्ली तथा व्यास सम्मान द्वारा गोविन्द मिश्र को उनकी साहित्य सेवाओं के लिए सम्मानित किया जा चुका है।
