ज्ञानेन्द्रपति

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1 जनवरी 1950 को झारखंड में जन्मे ज्ञानेन्द्रपति हिन्दी साहित्य के कवि हैं। ज्ञानेन्द्रपति हिन्दी के एक विलक्षण कवि-व्यक्तित्व हैं। वे उन थोड़े-से कवियों में हैं, जिनके बल पर, कविता की तरफ से जनता का जी उचटने के बावजूद, समकालीन कविता के सार्थक स्वर की विश्वसनीयता बरकरार है। इनकी प्रमुख रचनाएं हैं- कवि ने कहा, आँख हाथ बनते हुए, शब्द लिखने के लिए ही यह कागज़ बना है, गंगातट, संशयात्मा। ज्ञानेन्द्रपति को वर्ष 2006 में ‘संशयात्‍मा कविता संग्रह पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।

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