जाँ निसार अख़्तर का जन्म 18 फ़रवरी 1914 को ग्वालियर में हुआ था। वह भारत से 20 वीं सदी के एक महत्वपूर्ण उर्दू शायर, गीतकार और कवि थे।अख्तर साहब ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से सन 1935-36 में उर्दू में गोल्ड मेडल लेकर एम. ए. किया था। 1947 केेेेेे देश विभाजन के पहले एक ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज में उर्दू के प्रोफेसर रहे और फिर सन 1956 तक भोपाल केे हमीदिया कॉलेज में उर्दू विभाग के अध्यक्षष पद पर रहे। उनका मानना था कि आदमी जिस्म से नहीं दिलों दिमाग से बुड्ढा होता है।
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं- ख़ाक़-ए-दिल, तनहा सफ़र की रात, जाँ निसार अख़्तर-एक जवान मौत, नज़रे-बुतां, सलासिल, जाविदां, पिछले पहर, घर आंगन।
सन 1976 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।