कन्हैयालाल मिश्र का जन्म 29 मई 1906 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबन्द ग्राम में हुआ था। लेखन ’प्रभाकर’ जी के लिये लोक रंजन का माध्यम नहीं था। वे तो लिखते ही थे - नागरिकता के गुणों का विकास करने के लिये ! वे कहते थे - "हमारा काम यह नहीं कि हम विशाल देश में बसे चंद दिमागी अय्याशों का फालतू समय चैन और खुमारी में बिताने के लिये मनोरंजक साहित्य का मयखाना हर समय खुला रखें। हमारा काम तो यह है कि इस विशाल और महान देश के कोने-कोने में फैले जन साधारण के मन में विश्रंखलित वर्तमान के प्रति विद्रोह और भव्य भविष्य के निर्माण की श्रमशील भूख जगायें।" आदर्शों का साहित्य रचने वाले प्रभाकर जी ईमानदार लेखक थे।
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं- जिंदगी मुस्कुराई, जिंदगी लहलहाई, बाजे पायलिया के घुंघरू, महके आंगन चहके द्वार, आकाश के तारे धरती के फूल, माटी हो गई सोना, जियो तो ऐसे जियो, दीप जले शंख बजे। तपती पगडंडियों पर पदयात्रा, सतह से तह में, अनुशासन की राह में, यह गाथा वीर जवाहर की, एक मामूली पत्थर, दूध का तालाब, भूले हुए चेहरे, नई पीढ़ी नए विचार, बढ़ते चरण आदि।
मेरठ विवि द्वारा डी लिट की मानद उपाधि, भारतेन्दु पुरस्कार, गणेश शंकर विद्यार्थी व पराडकर पुरस्कार, महाराष्ट्र भारती पुरस्कार सहित दो दर्जन से अधिक सम्मान उन्हें मिले थे। राष्ट्रपति डा.आर वेंकट रमन ने उन्हें 1990 में पद्मश्री सम्मान भेंट किया।