मुद्राराक्षस

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मुद्राराक्षस का मूल नाम सुभाष चंद्र था। वह 21 जून 1933 को लखनऊ में पैदा हुए थे। दरअसल मुद्राराक्षस मात्र एक लेखक न होकर एक ऐसे सार्वजनिक बुद्धिजीवी थे जो हाशिये के समाज के मुद्दों, मुहिम और संघर्षों के सक्रिय सहभागी थे। मार्क्सवाद, लोहियावाद और आंबेडकरवाद से अपनी वैचारिक मनोभूमि निर्मित करते हुए उन्होंने अंततः अपने व्यक्तित्व को ‘आर्गेनिक इंटलेक्चुअल’ की जिस भूमिका में ढाला था वह उनका अपना चयन था। यह करते हुए बिना किसी बड़े ओहदे और कुलीन विरासत के मुद्रा जी ने हिंदी के वृहत्तर समाज में अपनी जो गहरी पैठ बनाई थी वह विरल है. विवाद, आमने-सामने की मुठभेड़, महानताओं का मर्दन, सत्ता-प्रतिष्ठान का प्रतिपक्षी होना उनके व्यक्तित्व की कुछ खास विशेषताएं थीं। प्रारंभिक रचनाएँ 1951 से छपनी शुरु हुईं और लगभग दो बरस के भीतर ही वे एक चर्चित लेखक हो गए थे। कहानी, कविता, उपन्यास, आलोचना, नाटक, इतिहास, संस्कृति और समाजशास्त्रीय क्षेत्र जैसी अनेक विधाओं में ऐतिहासिक हस्तक्षेप उनके लेखन की सबसे बड़ी पहचान है। इन सभी विधाओं में उनकी पैसठ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी प्रमुख रचनाएं हैं- आला अफसर, कालातीत, नारकीय, दंड विधान और हस्तक्षेप आदि। उन्हें साहित्य नाटक अकादमी पुरस्कार मिल चुका है।

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