नामवर सिंह
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नामवर सिंह का जन्म 28 जुलाई, 1926 को बनारस जिले की चंदौली तहसील, जो अब जिला बन गया है, के जीयनपुर गांव में हुआ था। बनारस के हीवेट क्षत्रिय स्कूल से मैट्रिक किया और उदयप्रताप कालेज से इंटरमीडिएट। 1941 में कविता से लेखकीय जीवन की शुरुआत की। नामवर सिंह की पहली कविता बनारस की 'क्षत्रियमित्र’ पत्रिका में छपी। नामवर सिंह ने वर्ष 1949 में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से बी.ए. और 1951 में वहीं से हिंदी में एम.ए. किया। वर्ष 1953 में वह बीएचयू में ही टेंपरेरी लेक्चरर बन गए। 1956 में उन्होंने 'पृथ्वीराज रासो की भाषा' विषय पर पीएचडी की।
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं-
बक़लम ख़ुद, हिन्दी के विकास में अपभ्रंश का योग, पृथ्वीराज रासो की भाषा, आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियाँ, छायावाद, इतिहास और आलोचना, कहानी : नयी कहानी, कविता के नये प्रतिमान, दूसरी परम्परा की खोज, वाद विवाद संवाद, आलोचक के मुख से, कविता की ज़मीन और ज़मीन की कविता, हिन्दी का गद्यपर्व, प्रेमचन्द और भारतीय समाज, ज़माने से दो दो हाथ, साहित्य की पहचान, आलोचना और विचारधारा, आलोचना और संवाद, पूर्वरंग।
साक्षात्कार-संवाद- कहना न होगा, बात बात में बात, सम्मुख, साथ साथ।
पत्र-संग्रह- काशी के नाम, तुम्हारा नामवर।
संकलन-संचयन- नामवर संचयिता, हिन्दी समीक्षा और आचार्य शुक्ल, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की जययात्रा, छायावाद: प्रसाद, निराला, महादेवी और पंत, रामविलास शर्मा।
सम्पादन कार्य
अध्यापन एवं लेखन के अलावा उन्होंने 1965 से 1967 तक जनयुग (साप्ताहिक) और 1967 से 1990 तक आलोचना (त्रैमासिक) नामक दो हिन्दी पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया।
सम्पादित पुस्तकें- संक्षिप्त पृथ्वीराज रासो, पुरानी राजस्थानी, कार्ल मार्क्स : कला और साहित्य चिन्तन), नागार्जुन : प्रतिनिधि कविताएँ, मलयज की डायरी (तीन खण्डों में), आधुनिक हिन्दी उपन्यास भाग-2, रामचन्द्र शुक्ल रचनावली।
उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार "कविता के नये प्रतिमान" के लिए, शलाका सम्मान हिंदी अकादमी, दिल्ली की ओर से, 'साहित्य भूषण सम्मान' उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से, शब्दसाधक शिखर सम्मान तथा महावीरप्रसाद द्विवेदी सम्मान से सम्मानित किया गया।
