नंदकिशोर आचार्य

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श्री नन्‍दकिशोर आचार्य का जन्‍म 31 अगस्‍त, 1945 को बीकानेर में हुआ। उन्हें आज के समय के सर्वाधिक रचनात्मक लेखकों में से एक माना जाता है। उनका रचनात्मक वैविध्य हमें चकित करता है। चाहे कविता हो, नाटक हो, आलोचना हो, शिक्षा-सभ्य‍ता-संस्कृति के प्रश्न हों, अनुवाद का व्यापक फलक हो या फिर संपादन आदि से संबंधित उपलब्धियाँ, सब दिशाओं में नंदकिशोर आचार्य की सजग-सक्रिय प्रतिभा और चेतना का प्रसार उल्लेखनीय और प्रशंसनीय है। रचनाएँ- अज्ञेय द्वारा संपादित 'चौथा सप्तक' के कवि डॉ. नंदकिशोर आचार्य मूलत: कवि हैं। उनकी कविताओं से उनके लोक और समाज-सांस्कृतिक परिवेश की अनुगूँजें ध्वनित होती हैं। बारह संग्रहों में संगृहीत उनकी अनेक कविताएँ दूसरी भाषाओं में भी अनूदित हो चुकी हैं। 'अज्ञेय की काव्य तितीर्षा', 'साहित्य का अध्यात्म', 'लेखक की साहित्यिकी', 'सभ्यता का विकल्प', 'शिक्षा का सत्यांग्रह' और 'संस्कृति की सामाजिकी' उनकी कुछ प्रमुख आलोचना पुस्तकें हैं। इनके अलावा ब्राडस्की, लोर्का और आधुनिक अरबी कविताओं सहित अनेकों दूसरी भाषाओं की श्रेष्ठ कविताओं के उन्होंने बेहद सुंदर अनुवाद प्रस्तुत किए हैं। नंदकिशोर आचार्य को 'मीरा पुरस्कार', 'बिहारी पुरस्कार', 'भुवनेश्वर पुरस्कार', 'राजस्थान संगीत नाटक अकादमी अवार्ड' जैसे कई पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। इनकी कविता " छीलते हुए अपने को " साहित्य अकादमी पुरस्कार(हिंदी)(2019)से सम्मानित किया गया।

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