नरेश मेहता का जन्म 15 फरवरी 1922 में मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र के शाजापुर कस्बे में हुआ। बनारस विश्वविद्यालय से आपने एम०ए० किया तत्पश्चात आल इण्डिया रेडियो इलाहाबाद में कार्यक्रम अधिकारी के रूप में कार्य किया। वह नई कविता के प्रमुख कवि माने जाते हैं वह अज्ञेय द्वारा संपादित ‘दूसरे तारसप्तक’ में प्रकाशित हुए। साहित्य के क्षेत्र में श्री नरेश मेहता जी नवीनता तथा प्रयोग के पक्षपाती रहे हैं। साम्यवादी विचारधारा का भी उनके साहित्य पर प्रभाव लक्षित होता है। नरेश मेहता जी की साहित्यिक रचनाओं में आधुनिकता का आग्रह दिखाई देता है।
उनकी कुछ प्रमुख रचनाएं हैं-
काव्य संग्रह – अरण्या, उत्सवा, बोलने दो चीड़ को, वनपाखी सुनो, तुम मेरा मौन हो आदि।
प्रबंध काव्य – संशय की एक रात, महाप्रस्थान, प्रवाद पर्व।
कहानी संग्रह – एक समर्पित महला, जलसाघर, तथापि।
उपन्यास – डूबते मस्तूल, वह पथ बंधु था आदि।
उन्हें 1988 ईस्वी में साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा 1992 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।