आर॰ के॰ नारायण का पूरा नाम राशीपुरम कृष्ण स्वामीनारायण था। उनका जन्म 10 अक्टूबर 1906 को मद्रास, ब्रिटिश भारत में हुआ था। नारायण अंग्रेजी साहित्य के भारतीय लेखकों में तीन सबसे महान् उपन्यासकारों में गिने जाते हैं। मुल्कराज आनंद तथा राजा राव के साथ उनका नाम भारतीय अंग्रेजी लेखन के आरंभिक समय में 'बृहत्त्रयी' के रूप में प्रसिद्ध है। मुख्यतः उपन्यास तथा कहानी विधा को अपनाते हुए उन्होंने विभिन्न स्तरों तथा रूपों में मानवीय उत्थान-पतन की गाथा को अभिव्यक्त करते हुए अपने गंभीर यथार्थवाद के माध्यम से रचनात्मक कीर्तिमान स्थापित किया है।
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं-
उपन्यास
स्वामी और उसके दोस्त, द बेचलर ऑफ़ आर्टस, द डार्क रूम, द इंग्लिश टीचर, मिस्टर संपथ, द फ़ाइनेंशीयल एक्सपर्ट, महात्मा का इंतजार, द गाइड, मालगुडी का आदमखोर, द वेंडर ऑफ़ स्वीट्स, द पेंटर ऑफ़ साइन्ज़, ए टाइगर फ़ॉर मालगुडी, टाल्केटिव मेन, द वर्ल्ड ऑफ़ नागराज, ग्रेन्डमदर्स टेल।
संकलन-
मालगुडी की कहानियाँ (मालगुडी डेज़), एन एस्ट्रोलॉजर्स डे एंड अदर स्टोरीज, लॉली रोड एंड अदर स्टोरीज, ए हॉर्स एंड टू गोट्स, अंडर द बेनियन ट्री ऑंड अदर स्टोरीज, ग्रेन्डमदर्स टेल ऑंड अदर स्टोरीज।
निबंध-
नेक्स्ट सन्डे, रिलक्टेंट गुरु, ए राइटर्स नाइटमेयर, द वर्ल्ड ऑफ़ स्टोरी-टेलर।
अन्य कृतिया-
माइ डेज, माइ डेटलेस डायरी, द एमेरल्ड रूट, गाॅड्स, डेमन्स एंड अदर्स, द रामायण, द महाभारत।
सन् 1960 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।