रामविलास शर्मा

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डॉ. राम विलास शर्मा का जन्म 10 अक्तूबर 1912 को हुआ था। वह आधुनिक हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध आलोचक, निबंधकार, विचारक एवं कवि थे। व्यवसाय से अंग्रेजी के प्रोफेसर, दिल से हिन्दी के प्रकांड पंडित और महान विचारक, ऋग्वेद और मार्क्स के अध्येता, कवि, आलोचक, इतिहासवेत्ता, भाषाविद, राजनीति-विशारद ये सब विशेषण उन पर समान रूप से लागू होते हैं। उनकी आलोचना प्रक्रिया में केवल साहित्य ही नहीं होता, बल्कि वे समाज, अर्थ, राजनीति, इतिहास को एक साथ लेकर साहित्य का मूल्यांकन करते हैं। अन्य आलोचकों की तरह उन्होंने किसी रचनाकार का मूल्यांकन केवल लेखकीय कौशल को जाँचने के लिए नहीं किया है, बल्कि उनके मूल्यांकन की कसौटी यह होती है कि उस रचनाकार ने अपने समय के साथ कितना न्याय किया है। उनकी प्रमुख रचनाएं हैं- साहित्यिक आलोचना- प्रेमचन्द, भारतेन्दु युग, निराला, प्रेमचन्द और उनका युग, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, प्रगतिशील साहित्य की समस्याएँ, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और हिन्दी आलोचना, विराम चिह्न, आस्था और सौन्दर्य, निराला की साहित्य साधना-1, निराला की साहित्य साधना-2, निराला की साहित्य साधना-3 , महावीरप्रसाद द्विवेदी और हिन्दी नवजागरण, नयी कविता और अस्तित्ववाद, परम्परा का मूल्यांकन, भाषा युगबोध और कविता, कथा विवेचना और गद्यशिल्प, मार्क्सवाद और प्रगतिशील साहित्य, भारतीय साहित्य के इतिहास की समस्याएँ, भारतीय साहित्य की भूमिका। भाषा-समाज और भाषाविज्ञान- भाषा और समाज, भारत की भाषा समस्या, भारत के प्राचीन भाषा परिवार और हिन्दी-1, भारत के प्राचीन भाषा परिवार और हिन्दी-2, भारत के प्राचीन भाषा परिवार और हिन्दी-3, ऐतिहासिक भाषाविज्ञान और हिन्दी भाषा। इतिहास, समाज और संस्कृति एवं दर्शन- मानव सभ्यता का विकास, सन् सत्तावन की राज्यक्रान्ति, भारत में अंग्रेज़ी राज और मार्क्सवाद (दो खण्डों में), मार्क्स और पिछड़े हुए समाज, मार्क्स, त्रोत्स्की और एशियाई समाज, स्वाधीनता संग्राम : बदलते परिप्रेक्ष्य, भारतीय इतिहास और ऐतिहासिक भौतिकवाद, पश्चिमी एशिया और ऋग्वेद, भारतीय नवजागरण और यूरोप, इतिहास दर्शन, भारतीय संस्कृति और हिन्दी प्रदेश (दो खण्डों में), गाँधी, आम्बेडकर, लोहिया और भारतीय इतिहास की समस्याएँ, भारतीय सौन्दर्य-बोध और तुलसीदास, पाश्चात्य दर्शन और सामाजिक अन्तर्विरोध- थलेस से मार्क्स तक (प्रस्तुत पुस्तक में डॉ॰ रामविलास शर्मा की 4 मौलिक पुस्तकों-- 'भारतीय नवजागरण और यूरोप', 'इतिहास दर्शन', मार्क्स और पिछड़े हुए समाज' तथा 'भारतीय इतिहास और ऐतिहासिक भौतिकवाद'। कविता-नाटक-उपन्यास- चार दिन (उपन्यास), 'तार सप्तक' में संकलित कविताएँ, महाराजा कठपुतली सिंह, पाप के पुजारी, बुद्ध वैराग्य तथा प्रारम्भिक कविताएँ, सदियों के सोये जाग उठे, रूपतरंग। आत्मकथा-साक्षात्कार-पत्रसंवाद-सम्पादकीय- मेरे साक्षात्कार, अपनी धरती अपने लोग (आत्मकथा, तीन खण्डों में), आज के सवाल और मार्क्सवाद (साक्षात्कार), मित्र-संवाद (केदारनाथ अग्रवाल से पत्र व्यवहार), अत्र कुशलं तत्रास्तु, भाषा, साहित्य और जातीयता। आंग्ल कृतियाँ- An introduction to the English romantic poetry, Nineteenth century poets, Essays on Shakespearean Tragedy, keats and the pre-Raphaelites. सम्पादित कृतियाँ- गीतिमाला, जहाज और तूफान, घर की बात, लोकजागरण और हिन्दी साहित्य , प्रगतिशील काव्यधारा और केदारनाथ अग्रवाल, तीन महारथियों के पत्र, कवियों के पत्र। उन्हें 1970 में 'निराला की साहित्य साधना' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1988 में शलाका सम्मान, 1990 में भारत भारती पुरस्कार, 1991 में 'भारत के प्राचीन भाषा परिवार और हिन्दी' के लिए व्यास सम्मान से सम्मानित किया गया।

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