रामवृक्ष बेनीपुरी

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बेनीपुरी जी का जन्म 23 दिसम्बर, ‎1899 को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में बेनीपुर नामक ग्राम में हुआ था। वह भारत के एक महान विचारक, चिन्तक, मनन करने वाले क्रान्तिकारी साहित्यकार, पत्रकार, संपादक थे। वे हिन्दी साहित्य के शुक्लोत्तर युग के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। आपने गद्य-लेखक, शैलीकार, पत्रकार, स्वतंत्रता सेनानी, समाज-सेवी और हिंदी प्रेमी के रूप में अपनी प्रतिभा की अमिट छाप छोड़ी है। राष्ट्र-निर्माण, समाज-संगठन और मानवता के जयगान को लक्षय मानकर बेनीपुरी जी ने ललित निबंध, रेखाचित्र, संस्मरण, रिपोर्ताज, नाटक, उपन्यास, कहानी, बाल साहित्य आदि विविध गद्य-विधाओं में जो महान रचनाएँ प्रस्तुत की हैं, वे आज की युवा पीढ़ी के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। उनकी प्रमुख रचनाएं हैं- नाटक- अम्बपाली, सीता की माँ, संघमित्रा, अमर ज्योति, तथागत, सिंहल विजय, शकुन्तला, रामराज्य,नेत्रदान, गाँव के देवता, नया समाज, विजेता, बैजू मामा, शमशान में अकेली अन्धी लड़की के हाथ में अगरबत्ती। सम्पादन एवं आलोचना- विद्यापति की पदावली, बिहारी सतसई की सुबोध टीका। जीवनी- जयप्रकाश नारायण। संस्मरण तथा निबन्ध- पतितों के देश में, चिता के फूल, लाल तारा, कैदी की पत्नी, माटी, गेहूँ और गुलाब, जंजीरें और दीवारें, उड़ते चलो, उड़ते चलो, मील के पत्थर। ललित गद्य- वन्दे वाणी विनायक। 1999 में भारतीय डाक सेवा द्वारा बेनीपुरी जी के सम्मान में भारत का भाषायी सौहार्द मनाने हेतु भारतीय संघ के हिन्दी को राष्ट्र-भाषा अपनाने की अर्ध-शती वर्ष में डाक-टिकटों का एक सेट जारी किया। उनके सम्मान में बिहार सरकार द्वारा वार्षिक अखिल भारतीय रामवृक्ष बेनीपुरी पुरस्कार दिया जाता है।

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