शैलेश मटियानी का जन्म उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र के अन्तर्गत अल्मोड़ा जिले के बाड़ेछीना नामक गाँव में 14 अक्टूबर 1931 में हुआ था। उनका मूल नाम रमेशचन्द्र सिंह मटियानी था। आधुनिक हिन्दी साहित्य-जगत् में नयी कहानी आन्दोलन के शैलेश मटियानी दौर के कहानीकार एवं प्रसिद्ध गद्यकार थे।
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं-
उपन्यास
उगते सूरज की किरन, पुनर्जन्म के बाद, भागे हुए लोग, डेरे वाले, हौलदार, माया सरोवर, उत्तरकांड, रामकली, मुठभेड़, चन्द औरतों का शहर, आकाश कितना अनन्त है, बर्फ गिर चुकने के बाद, सूर्यास्त कोसी, नाग वल्लरी, बोरीवली से बोरीबंदर तक, अर्धकुम्भ की यात्रा, गापुली गफूरन, सावितरी, छोटे-छोटे पक्षी, मुख सरोवर के हंस, कबूतर खाना, बावन नदियों का संगम आदि।
कहानी संग्रह
पाप मुक्ति तथा अन्य कहानियां, सुहागिनी तथा अन्य कहानियां, अतीत तथा अन्य कहानियां, हारा हुआ, सफर घर जाने से पहले, छिंदा पहलवान वाली गली, भेड़े और गड़रिये, तीसरा सुख, बर्फ की चट्टानें, अहिंसा तथा अन्य कहानियां, नाच जमूरे नाच, माता तथा अन्य कहानियां, उत्सव के बाद, शैलेश मटियानी की प्रतिनिधि कहानियां, संदर्भ और परिदृष्य (स.) आदि।
लेख संग्रह
राष्ट्रभाषा का सवाल, कागज की नाव, लेखक की हैसियत से (संस्मरण), किसे पता है राष्ट्रीय शर्म का मतलब? , जनता और साहित्य, लेखक और संवेदना, मुख्यधारा का सवाल, यथा-प्रसंग, कभी कभार, किसके राम कैसे राम, यदाकदा, त्रिज्या आदि।
बाल साहित्य
बिल्ली के बच्चे, मां की वापसी, कालीपार की लोक कथाएं, हाथी चींटीं की लड़ाई। चांदी का रूपैया और रानी गौरेया, फूलों की नगरी, भरत मिलाप, सुबह के सूरज, मां तुम आओ, योग संयोग प्रकाश्य : मुड़-मुड़ कर मत देख, कहानी कैसे बनती है
अप्रकाशित
पर्वत से सागर तक, राज्य और कानून
उन्हें फणीश्वरनाथ रेणु पुरस्कार (1984), उत्तर प्रदेश सरकार का सम्मान, शारदा सम्मान, साधना सम्मान, उत्तर प्रदेश सरकार का 'लोहिया पुरस्कार' ।उत्तर प्रदेश सरकार का संस्थागत सम्मान, शारदा सम्मान, केडिया संस्थान से साधना सम्मान, उत्तर प्रदेश सरकार से लोहिया पुरस्कार से सम्मानित किया गया।