13 जुलाई 1911 को जन्मे शमशेर बहादुर सिंह हिन्दी के प्रयोगवादी कवियों में से प्रमुख हैं। वह 'दूसरे सप्तक' के कवियों में से एक हैं। शमशेर की कविताओं में बिंबों और प्रतीकों का अद्भुत प्रयोग मिलता है। इन्हें 'कवियों का कवि' कहा जाता है। उनकी कविताएं आधुनिक बोध की कविताएं हैं। उनके वक्त की स्थितियों की तस्वीर हैं।
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं-
‘कुछ कविताएं’ (1956), ‘कुछ और कविताएं’ (1961), ‘शमशेर बहादुर सिंह की कविताएं’ (1972), ‘इतने पास अपने’ (1980), ‘उदिता : अभिव्यक्ति का संघर्ष’ (1980), ‘चुका भी हूं नहीं मैं’ (1981), ‘बात बोलेगी’ (1981), ‘काल तुझसे होड़ है मेरी’ (1988), ‘शमशेर की ग़ज़लें
गद्य रचनाएँ- दो आब (निबंध-संग्रह), प्लाट का मोर्चा, कुछ गद्य रचनाएँ, रंजना अरगड़े, कुछ और गद्य रचनाएँ आदि।
12 मई 1993 को उनका देहावसान हो गया। उन्हें 1977 में "चुका भी हूँ नहीं मैं" के लिये 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।