शिवप्रसाद सिंह

0 लेख
शिवप्रसाद सिंह 19 अगस्त 1928 को जलालपुर, जमनिया, बनारस में पैदा हुए शिवप्रसाद सिंह ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से 1953 में एम.ए. (हिन्दी) किया। 1957 में पीएच.डी.। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में ही अध्यापक नियुक्त हुए, जहाँ प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्ष भी रहे। शिक्षा जगत के जाने-माने हस्ताक्षर शिवप्रसाद सिंह का साहित्य की दुनिया में भी उतना ही ऊँचा स्थान है। प्राचीन और आधुनिक दोनों ही समय के साहित्य से अपने गुरु पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी की तरह समान रूप से जुड़े शिवप्रसादजी 'नयी कहानी' आन्दोलन के आरम्भकर्ताओं में से हैं। कुछ लोगों ने उनकी ‘दादी माँ' कहानी को पहली ‘नयी कहानी' माना है। उनकी प्रमुख रचनाएं हैं- अन्धकूप (सम्पूर्ण कहानियाँ, भाग-1), एक यात्रा सतह के नीचे (भाग-2), अमृता (भाग-3); अलग-अलग वैतरणी, गली आगे मुड़ती है, शैलूष, मंजुशिमा, औरत, कोहरे में युद्ध, दिल्ली दूर है (उपन्यास); मानसी गंगा, किस-किसको नमन करूँ (सम्पूर्ण निबन्धों के दो खण्ड); उत्तर योगी (महर्षि श्री अरविन्द की जीवनी); कीर्तिलता और अवहट्ठ भाषा, विद्यापति, आधुनिक परिवेश और नवलेखन, आधुनिक परिवेश और अस्तित्ववाद (आलोचना) आदि। व्यास सम्मान, साहित्य अकादेमी पुरस्कार आदि अनेक पुरस्कारों से सम्मानित।

रचनाएँ

No posts to display

प्रचलित लेखक

आपकी रचना