शिवमंगल सिंह सुमन

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शिवमंगल सिंह 'सुमन' का जन्म 5 अगस्त 1915 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के झगरपुर में हुआ था। सुमन जी ने अपनी शिक्षा ग्वालियर, रीवा, इंदौर, उज्जैन आदि स्थानों में जाकर पूर्ण की। शिक्षा में उन्होंने एम. ए. और पी. एच.डी. किया था। इसके बाद इन्होने 1950 में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से डी. लिट. की उपाधि प्राप्त की। शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ जी ने 1968-78 में विक्रम विश्वविद्याल, उज्जैन में कुलपति के रूप में भी कार्य किया है। वह कालिदास अकादमी, उज्जैन के कार्यकारी अध्यक्ष भी थे। इन्होने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज में हिंदी भी पढाई है। सुमन जी कुशल अध्यापक माने जाते हैं, वे प्रारंभ से ही शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए थे और अध्यापन कार्य में संलग्न रहे। उनकी प्रमुख रचनाएं हैं- कविता संग्रह में – हिल्लोल (1939), जीवन के गान (1942), युग का मोल (1945), प्रलय सृजन (1950), विश्वास बढ़ता ही गया (1948), विध्य हिमालय (1960), मिट्टी की बारात (1972), वाणी की व्यथा (1980), कटे अँगूठों की वंदनवारें (1991) आदि। उन्हें 1974 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1999 में पद्म भूषण, 1974 में पद्म श्री, 1958 में देवा पुरस्कार, 1974 में सोवियत भूमि नेहरू पुरस्कार, 1973 में डी. लिट्. भागलपुर विश्वविद्यालय, 1983 में डी. लिट्. जबलपुर विश्वविद्यालय तथा 1993 में शिखर सम्मान और भारत भारती पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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