श्रीलाल शुक्ल का जन्म 31 दिसंबर, 1925 को लखनऊ जिले के एक कस्बे अतरौली में हुआ था। उन्होंने 1949 में राज्य सिविल सेवा से नौकरी शुरू की। 1983 में भारतीय प्रशासनिक सेवानिर्वित हुए। उनका विधिवत लेखन 1954 से शुरू होता है और इसी के साथ हिंदी गद्य का एक गौरवशाली अध्याय आकार लेने लगता है। उनका प्रथम प्रकाशित उपन्यास ‘सूनी घाटी का सूरज’ 1957 में तथा प्रथम प्रकाशित व्यंग्य ‘अंगद का पांव’ 1928 में प्रकाशित हुआ था।
उपन्यास-
सूनी घाटी का सूरज (1957), अज्ञातवास (1962), राग दरबारी (1968), आदमी का जहर (1957), सीमाएँ टूटती हैं (1973), मकान (1976), पहला पडाव (1987), विश्रामपुर का सन्त (1998), बब्बर सिंह और उसके साथी (1999), राग विराग (2001)।
व्यंग्य निबंध संग्रह-
अंगद के पाँव (1958), यहाँ से वहाँ (1970), मेरी श्रेष्ठ व्यंग्य रचनाएँ (1979), उमरावनगर में कुछ दिन (1986), कुछ जमीन में कुछ हवा में (1990), आओ बैठ लें कुछ देर (1995), अगली शताब्दी के शहर (1996), जहालत के पचास साल (2003), खबरों की जुगाली (2005)।
कहानी संग्रह ( लघुकथाएँ) –
ये घर में नहीं (1979), सुरक्षा तथा अन्य कहानियाँ (1991), इस उम्र में (2003), दस प्रतिनिधि कहानियाँ (2003)।
साक्षात्कार संग्रह-
मेरे साक्षातकार (2002)।
संस्मरण-
कुछ साहित्य चर्चा भी (2008)।
आलोचना-
भगवती चरण वर्मा (1989), अमृतलाल नागर(1994), अज्ञेयःकुछ रंग कुछ राग (1999)।
संपादन-
हिन्दी हास्य व्यंग्य संकलन (2000)।
बाल साहित्य:
बब्बर सिंह और उसके साथी।
उन्हें 1970 में राग दरबारी के लिये साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया तथा 2008 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।