सियारामशरण गुप्त ( Siyaram Sharan Gupt) का जन्म 4 सितंबर 1895 को हुआ था। वह हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार और राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के छोटे भाई थे। वह गाँधीवाद से विशेष प्रभावित थे। एक कवि के रुप में आपको विशेष ख्याति मिली। कथाकार के रूप में भी आपने कथा-साहित्य में अपना स्थान बनाया। श्री सियारामशरण गुप्त राष्ट्रकवि श्री मैथिलीशरण गुप्त के छोटे भाई थे। कवि, कथाकार और निबन्ध लेखक के रूप में उन्होंने अपना विशिष्ट स्थान बना लिया था। श्री सियारामशरण गुप्त की रचनाओं में उनके व्यक्तित्व की सरलता, विनयशीलता, सात्विकता और करुणा सर्वत्र प्रतिफलित हुई है। वास्तव में गुप्त जी मानवीय संस्कृति के साहित्यकार हैं। उनकी रचनाएँ सर्वत्र एक प्रकार के चिन्तन, आस्था-विश्वासों से भरी हैं, जो उनकी अपनी साधना और गांधी जी के साध्य साधन की पवित्रता की गूंज से ओत-प्रोत हैं।
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं-
खण्ड काव्य- मौर्य विजय(1914), अनाथ, आर्द्रा, विषाद, दूर्वा दल, आत्मोत्सर्ग, पाथेय, मृण्मयी, बापू, उन्मुक्त, दैनिकी, नकुल, सुनन्दा और गोपिका।
कहानी संग्रह- मानुषी
नाटक- पुण्य पर्व
अनुवाद- गीता सम्वाद
नाट्य- उन्मुक्त गीत
कविता संग्रह- अनुरुपा तथा अमृत पुत्र
काव्यग्रन्थ- दैनिकी नकुल, नोआखली में, जय हिन्द, पाथेय, मृण्मयी तथा आत्मोसर्ग।
उपन्यास- अन्तिम आकांक्षा तथा नारी और गोद।
निबन्ध संग्रह- झूठ-सच।
पद्यानुवाद- ईषोपनिषद, धम्मपद और भगवत गीता
उन्हें दीर्घकालीन साहित्य सेवाओं के लिए सन् 1962 में 'सरस्वती हीरक जयन्ती' के अवसर पर सम्मानित किया गया। 1941 में उन्हें नागरी प्रचारिणी सभा वाराणसी द्वारा "सुधाकर पदक' प्रदान किया गया।