सुरेन्द्र वर्मा का जन्म 7 सितम्बर 1941 को हुआ था। न्होंने नाटककार के रूप में शुरुआत की, जब उनका नाटक 'सूर्य की अंतिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक' (1972) काफी प्रसिद्ध हुआ; इसका छह भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है।[2] उनका लंबे समय से साथ संबंध रहा है राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय.और लघु कथाओं, व्यंग्य, उपन्यास और नाटकों के लगभग पंद्रह शीर्षक प्रकाशित किए हैं।
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं-
उपन्यास- अंधेरे से परे, बम्बई भित्त लेख, मुझे चाँद चाहिए, दो मुर्दों के लिए गुलदस्ता, काटना शमी का वृक्ष पद्य पंखुरी की धार से।
नाटक- सूर्य की अंतिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक , आठवाँ सर्ग, छोटे सैयद बड़े सैयद, क़ैद-ए-हयात, रति का कंगन, द्रौपदी, शकुंतला की अंगूठी, तीन नाटक।
कहानी संग्रह- प्यार की बातें तथा अन्य कहानियाँ।
इनके द्वारा रचित एक उपन्यास मुझे चाँद चाहिए के लिये उन्हें सन् 1996 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।