सुशांत सुप्रिय

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रचनाएँ

बर्फ़

बर्फ़ पिताजी के भीतर एक अकेलापन रहता है। सुबह की धूप में चमकता हुआ रात की चाँदनी में दमकता हुआ। बारिश में नहाता हुआ। ठंड...

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