स्वदेश दीपक एक भारतीय नाटककार, उपन्यासकार और लघु कहानी लेखक है। उन्होंने 15 से भी अधिक प्रकाशित पुस्तके लिखी हैं। स्वदेश दीपक हिंदी साहित्यिक परिदृश्य पर 1960 के दशक के मध्य से सक्रिय है। उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की थी। छब्बीस साल उन्होंने अम्बाला के गांधी मेमोरियल कालेज मे अंग्रेजी साहित्य पढ़ाया। उन्हें संगीत नाटक अकादमी सम्मान (2004) से सम्मानिय किया गया। वे 2 जून 2006 को, सुबह की सैर के लिए निकले और आज तक वापस नही आए।
कहानी संग्रह- अश्वारोही (1973), मातम (1978), तमाशा (1979), प्रतिनिधि कहानियां (1985), बाल भगवान (1986), किसी अप्रिय घटना का समाचार नहीं (1990), मसखरे कभी नहीं रोते (1997), निर्वाचित कहानियां (2003)
उपन्यास- नंबर 57 स्क्वाड्रन (1973), मायापोत (1985)
नाटक- बाल भगवान (1989), कोर्ट मार्शल (1991), जलता हुआ रथ (1997), सबसे उदास कविता (1997), काल कोठरी (1999)
संस्मरण- मैंने मांडू नहीं देखा (2003)