तकषि शिवशंकर पिल्लै

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मलयालम के सुप्रसिद्ध कथाकार तकषि शिवशंकर पिल्लै का जन्म 1912 में केरल के आलप्पुषा जिले के तकषि गाँव में हुआ। वे अंपलपुषा की अदालत में अधिवक्ता रहे। इसके साथ ही साथ उन्होंने 'तोट्टियुटे मकन्' (भंगी का बेटा), 'रंटिटंगषि' (दो सेर), 'चेम्मीन' (झींगा) 'एणिप्पटिकल्' (सीढ़ियाँ), 'कयर' (रस्सी) सहित बीस से ज्यादा उपन्यास तथा छह सौ से ज्यादा कहानियाँ लिखीं। उत्कृष्ट साहित्य-सेवा के लिए उन्हें 'केरल साहित्य अकादेमी पुरस्कार', केंद्र साहित्य अकादमी पुरस्कार', 1984 का 'भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार', 1985 में भारत सरकार ने 'पद्मभूषण' से सम्मानित किया।

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