कवि त्रिलोचन शास्त्री का जन्म उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के कटघरा, चिरानीपट्टी में 20 अगस्त 1917 को हुआ था। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी में एम.ए. अँग्रेजी के छात्र रहे त्रलोचन शास्त्री का मूल नाम वासुदेव सिंह था। त्रिलोचन शास्त्री हिंदी के अतिरिक्त अरबी और फारसी भाषाओं के निष्णात ज्ञाता माने जाते थे। पत्रकारिता के क्षेत्र में भी वे खासे सक्रिय रहे है। उन्होंने प्रभाकर, वानर, हंस, आज, समाज जैसी पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया। त्रिलोचन शास्त्री 1995 से 2001 तक जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। इसके अलावा वाराणसी के ज्ञानमंडल प्रकाशन संस्था में भी काम करते रहे और हिंदी व उर्दू के कई शब्दकोषों की योजना से भी जुडे़ रहे। उन्हें हिंदी सॉनेट का साधक माना जाता है। उन्होंने इस छंद को भारतीय परिवेश में ढाला और लगभग 550 सॉनेट की रचना की।
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं-
कविता संग्रह- धरती, गुलाब और बुलबुल, दिगंत, ताप के ताए हुए दिन, शब्द, उस जनपद का कवि हूँ, अरधान, तुम्हें सौंपता हूँ, मेरा घर, चैती, अनकहनी भी कुछ कहनी है, जीने की कला
संपादित- मुक्तिबोध की कविताएँ
कहानी संग्रह- देशकाल
डायरी- दैनंदिनी
त्रिलोचन शास्त्री को 1989-90 में हिंदी अकादमी ने शलाका सम्मान से सम्मानित किया था। हिंदी साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हे 'शास्त्री' और 'साहित्य रत्न' जैसे उपाधियों से सम्मानित किया जा चुका है। 1982 में ताप के ताए हुए दिन के लिए उन्हें साहित्य अकादमी का पुरस्कार भी मिला था।