यू. आर. अनन्तमूर्ति का जन्म 21 दिसम्बर 1932 को मिलिगे नामक गाँव, जिला शिमोगा, कर्नाटक में हुआ था। उनका पूरा नाम उडुपी राजगोपालाचार्य अनंतमूर्ति था। इन्हें कन्नड़ साहित्य के नव्या आंदोलन का प्रणेता माना जाता है। उन्होंने महात्मा गांधी विश्वविद्यालय तिरुअनन्तपुरम् और केंद्रीय विश्वविद्यालय गुलबर्गा के कुलपति के रूप में भी काम किया था।
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं-
उपन्यास- संस्कार, अवस्थ और भव;
कहानी- एंदेन्दु मुगियद कथे और मौनी ;
कविता- बावली, मिथुन;
नाटक- सन्निवेश, प्रज्ञे मत्तु परिसर, पूर्वापर, आवाहने
उन्हें 1984 में राज्यसभा पुरस्कार, 1994 ई. में ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा कन्नड़ साहित्य में योगदान और आम आदमी के लिए लिखने की उनकी नई सोच के लिए प्रदान किया गया।, 1998 में पद्म भूषण, भारत सरकार द्वारा दिया गया नागरिक सम्मान, 2004 में साहित्य अकादमी फेलोशिप, 2008 में नडोजा पुरस्कार (कनाडा विश्वविद्यालय द्वारा) से सम्मानित किया गया।