उपेन्द्रनाथ 'अश्क' का जन्म 14 दिसम्बर, सन् 1910 को पंजाब के जालंधर नामक नगर में हुआ। उपेन्द्रनाथ अश्क निबन्धकार, लेखक, कहानीकार तथा उपन्यासकार थे। उन्होने मुंशी प्रेमचंद की सलाह पर हिन्दी में लिखना शुरू किया। उपेंद्रनाथ अश्क ने साहित्य की प्राय: सभी विधाओं में लिखा है, लेकिन उनकी मुख्य पहचान एक कथाकार के रूप में ही है। काव्य, नाटक, संस्मरण, उपन्यास, कहानी, आलोचना आदि क्षेत्रों में वे खूब सक्रिय रहे। इनमें से प्राय: हर विधा में उनकी एक-दो महत्वपूर्ण एवं उल्लेखनीय रचनाएं होने पर भी वे मुख्यत: कथाकार हैं। उन्होंने पंजाबी में भी लिखा है, हिंदी-उर्दू में प्रेमचंदोत्तर कथा-साहित्य में उनका विशिष्ट योगदान है। जैसे साहित्य की किसी एक विधा से वे बंधकर नहीं रहे उसी तरह किसी विधा में एक ही रंग की रचनाएं भी उन्होंने नहीं की।
उपन्यास
गिरती दीवारें, शहर में घूमता आईना, गर्म राख, सितारों के खेल, कहानी संग्रह, सत्तर श्रेष्ठ कहानियां, जुदाई की शाम के गीत, काले साहब, पिंजरा।
नाटक-
लौटता हुआ दिन, बड़े खिलाड़ी, जय-पराजय, स्वर्ग की झलक, भँवर, अंजो दीदी।
एकांकी संग्रह-
अन्धी गली, मुखड़ा बदल गया, चरवाहे, काव्य, एक दिन आकाश ने कहा, प्रातःप्रदीप, दीप जलेगा, बरगद की बेटी, उर्म्मियाँ, रिज पर।
संस्मरण-
मण्टो मेरा दुश्मन, फिल्मी जीवन की झलकियाँ, आलोचना, अन्वेषण की सहयात्रा, हिन्दी कहानी: एक अन्तरंग परिचय।
अनुवाद-
‘रंग साज’ (1958)- रूस के प्रसिद्ध कहानीकार ‘ऐंतन चेखव’ के लघु उपन्यास का अनुवाद।
‘ये आदमी ये चूहे’ (1950)- स्टीन बैंक के प्रसिद्ध उपन्यास ‘आव माइस एण्ड मैन’ का अनुवाद।
‘हिज एक्सेलेन्सी’ (1959)- अमर कथाकार दॉस्त्यॉवस्की के लघु उपन्यास ‘डर्टी स्टोरी’ का हिन्दी अनुवाद।
सम्पादन-
‘प्रतिनिधि एकांकी’, ‘रंग एकांकी’, ‘संकेत’।
अश्क जी को 1972 में ‘सोवियत लैन्ड नेहरू पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हे 1965 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।