वेद प्रताप वैदिक का जन्म 30 दिसम्बर 1944 को इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ था। वे सदैव प्रथम श्रेणी के छात्र रहे। दर्शन और राजनीति उनके मुख्य विषय थे। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में पीएचडी करने के पश्चात् कुछ समय दिल्ली में राजनीति शास्त्र का अध्यापन भी किया। अपने अफ़गानिस्तान सम्बन्धी शोधकार्य के दौरान श्री वैदिक को न्यूयार्क के कोलम्बिया विश्वविद्यालय, लन्दन के प्राच्य विद्या संस्थान, मास्को की विज्ञान अकादमी और काबुल विश्वविद्यालय में अध्ययन का विशेष अवसर मिला। अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के विशेषज्ञों में उनका स्थान महत्वपूर्ण है। उन्होंने लगभग पचास देशों की यात्रा की है। वे रूसी, फारसी, अंग्रेजी, संस्कृत व हिन्दी सहित अनेक भारतीय भाषाओं के विद्वान हैं। वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में अखिल भारतीय स्तर पर अनेकों बार पुरस्कृत किये जा चुके वैदिक जी अपने मौलिक चिन्तन और प्रभावशाली वक्तृत्व के लिये जाने जाते हैं।
उनकी प्रमुख रचनाएं हैं-
भारतीय विदेश नीति : नये दिशा संकेत, अंग्रेजी हटाओ : क्यों और कैसे ?, अफगानिस्तान में सोवियत-अमरीकी प्रतिस्पर्धा, हिन्दी का सम्पूर्ण समाचार-पत्र कैसा हो ?, अफगानिस्तान : कल, आज और कल, वर्तमान भारत, महाशक्ति भारत।
उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘अफगानिस्तान में सोवियत-अमरीकी प्रतिस्पर्धा‘ ग्रन्थ पर गोविन्द वल्लभ पन्त पुरस्कार, उत्तर प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा हिंदी सेवा के लिये ‘पुरुषोत्तम दास टण्डन‘ स्वर्ण पदक, प्रधानमन्त्री द्वारा रामधारी सिंह दिनकर शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया।