यशपाल जैन का जन्म 1 सितम्बर 1912 को विजयगढ़ ज़िला अलीगढ़ में हुआ था। यशपाल जैन ने मानवीय मूल्यों पर अडिग रहकर कहानियों, कविताओं, संस्मरण, बोध कथाओं, निबंधों और आत्म वृतांत से ¨हदी साहित्य के भंडार को समृद्ध किया। संस्मरण लेखन में खूब ख्याति पायी। डायरी पत्र लेखन व अनुवाद लेखन से ¨हदी साहित्य को समृद्ध किया। सैलानी के रूप में उनका यात्रा साहित्य महत्वपूर्ण स्थलों संस्कृति, सभ्यता और साहित्य का समन्वय आज भी दुर्लभ है। देश-विदेश की खूब यात्राएं कीं और ¨हदी और साहित्य का प्रचार किया। अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी जुड़े रहे।
आपने अनेक उपन्यास, कहानी संग्रह, एक आत्मकथा, 3 प्रकाशित नाटक, कविता संग्रह, यात्रा वृत्तांत, व संग्रहों का प्रकाशन व संपादन किया। यशपाल ने अनेक बालोपयोगी कहानियां लिखी, पर उपन्यास नहीं लिखा था। अचानक उन्हें आभास हुआ कि बच्चों के लिए उपन्यास भी लिखना चाहिए और उनकी लेखनी उस दिशा में चल पड़ी। लगभग सवा महीने में यह रचना पूरी हो गई। इस उपन्यास का नाम 'राजकुमार की प्रतिज्ञा' था।
उन्हें पद्मश्री से अलंकृत किया गया।