कविता

प्रेम

उमंगों भरा दिल किसी का न टूटे।पलट जायँ पासे मगर जुग न फूटे।कभी संग निज संगियों का न छूटे।हमारा चलन घर हमारा न लूटे।सगों...

जो मेरे घर कभी नहीं आएँगे

जो मेरे घर कभी नहीं आएँगेमैं उनसे मिलनेउनके पास चला जाऊँगा।एक उफनती नदी कभी नहीं आएगी मेरे घरनदी जैसे लोगों से मिलनेनदी किनारे जाऊँगाकुछ...

उदय प्रकाश की कविताएँ

डाकिया डाकियाहांफता हैधूल झाड़ता हैचाय के लिए मना करता है डाकियाअपनी चप्पलफिर अंगूठे में संभालकरफँसाता है और, मनीआर्डर के रुपयेगिनता है। वसंत रेल गाड़ी आती हैऔर बिना रुकेचली जाती...

रिक्शेवाला

आवाज़ देकररिक्शेवाले को बुलायावो कुछलंगड़ाता‌ हुआ आया। मैंने पूछा‌-यार, पहले ये बताओगेपैर में चोट‌ ‌है कैसे चलाओगे? रिक्शेवाला कहता है-बाबू जीरिक्शा पैर से नहींपेट से चलता...

अमावस की काली रातों में

मावस की काली रातों में दिल का दरवाजा खुलता है,जब दर्द की काली रातों में गम आंसू के संग घुलता है,जब पिछवाड़े के कमरे...

मेरा जीवन

मेरा एक जीवन हैउसमें मेरे प्रिय हैं, मेरे हितैषी हैं, मेरे गुरुजन हैंउसमें कोई मेरा अनन्यतम भी है पर मेरा एक और जीवन हैजिसमें मैं...

प्रचलित