कविता

चीनी चाय पीते हुए

चाय पीते हुएमैं अपने पिता के बारे में सोच रहा हूँ।आपने कभीचाय पीते हुएपिता के बारे में सोचा है?अच्छी बात नहीं हैपिताओं के बारे...

बच्‍चे काम पर जा रहे हैं

कोहरे से ढँकी सड़क पर बच्‍चे काम पर जा रहे हैंसुबह सुबह बच्‍चे काम पर जा रहे हैंहमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति है यहभयानक...

निशान्त जैन की कवितायें

वक़्त कहाँ ... वक़्त कहाँ अब कुछ पल दादी के किस्सों का स्वाद चखूं,वक़्त कहाँ बाबा के शिकवे, फटकारें और डांट सहूँ। कहाँ वक़्त है मम्मी-पापा...

आराम करो

एक मित्र मिले, बोले, "लाला, तुम किस चक्की का खाते हो?इस डेढ़ छटांक के राशन में भी तोंद बढ़ाए जाते होक्या रक्खा माँस बढ़ाने...

साल मुबारक

जैसे सोच की कंघी में सेएक दंदा टूट गयाजैसे समझ के कुर्ते काएक चीथड़ा उड़ गयाजैसे आस्था की आँखों मेंएक तिनका चुभ गयानींद ने...

कुमार अंबुज की कवितायें

क्रूरता धीरे धीरे क्षमाभाव समाप्त हो जाएगाप्रेम की आकांक्षा तो होगी मगर जरूरत न रह जाएगीझर जाएगी पाने की बेचैनी और खो देने की पीड़ाक्रोध...

प्रचलित