दीक्षा चौधरी

2 लेख

रचनाएँ

अनदेखी दिल्ली

नवम्बर के बिखरे से दिन। न जाने क्यूँ मेरे मन में एक गडरिये का चित्र उभरता है। मुझे उसकी हाँक को अनसुना करके इधर...

दिवाली की तैयारियाँ

आह! दिवाली की तैयारियों के ये दिन! चूने की ख़ुशबू तो नहीं आ रही? देखो! नलके के पास हांडी में चूना भिगोकर रखा है...

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